दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी पांच मंजिला पीजी इमारत, तीन छात्रों की मौत; ग्वालियर के युवक ने बचाई कई जानें


साउथ कैंपस के पास पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से मची अफरा-तफरी, NDRF-दिल्ली पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, MP के युवक ने बचाईं कई जानें।


Deshgaon team
बड़ी बात Published On :

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के साउथ कैंपस से सटा हुआ है और यहां सैकड़ों छात्र पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों में रहते हैं। हादसा शिव मंदिर के पास दोपहर करीब 1:33 बजे हुआ। दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है। कई छात्र अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

जो इमारत गिरी, वह “हॉस्टल डेज़” नाम से एक पीजी के रूप में चल रही थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह करीब 40-50 साल पुरानी इमारत थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसमें करीब 15 कमरे थे और हर कमरे में दो-तीन छात्र साथ रहते थे। हादसे के वक्त इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में इमारत को छह मंजिला और 75-बेड की क्षमता वाली भी बताया गया है, जिसका ग्राउंड फ्लोर हाल ही में मरम्मत के दौर से गुजर रहा था। पास में रहने वाले डीयू साउथ कैंपस के एक छात्र के अनुसार, इमारत का मालिक पहले फ्लैट छात्रों को सीधे किराए पर देता था और हाल ही में इसे एक निजी पीजी ऑपरेटर को सौंपा गया था।

बचाए गए आठ लोगों में से दो को एम्स ट्रॉमा सेंटर लाए जाने पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक अन्य ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

बचाव अभियान युद्धस्तर पर

दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने में जुटी हैं। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनें भी लगाई गई हैं। एहतियात के तौर पर घटनास्थल से सटी एक और इमारत को खाली करा लिया गया है।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसकी स्कूटर इमारत के ठीक सामने खड़ी थी और अगर वह थोड़ा और करीब होता तो हादसे की चपेट में आ जाता। स्थानीय लोगों ने बताया कि गिरने के वक्त झटका इतना तेज था कि कई लोगों को भूकंप जैसा अहसास हुआ और आसपास की इमारतों से लोग घरों से बाहर भाग निकले।

मध्य प्रदेश के युवक ने निभाई अहम भूमिका

बचाव कार्य में मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले कृष्ण भारद्वाज की भूमिका खास रही। भारद्वाज दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव प्रचार के सिलसिले में दिल्ली में मौजूद थे और हादसे की खबर मिलते ही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि पुलिस और दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले ही उन्होंने अपनी करीब 25-30 लोगों की टीम के साथ मलबे से छात्रों को निकालना शुरू कर दिया था।

प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पहुंचीं और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने अधिकारियों को हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए और जिलाधिकारी, दिल्ली पुलिस व एनडीआरएफ के अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर स्थिति की जानकारी ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हादसे पर दुख जताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। गोवा में भाजपा के नए राज्य मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को भी इस हादसे के मद्देनजर संक्षिप्त कर दिया गया, जिसमें अमित शाह मौजूद थे।

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में भी एक पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारत ढह गई थी, जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हुए थे। सत्य निकेतन जैसे इलाकों में छात्रों के लिए किफायती किराये के मकानों की भारी मांग है, जिसके चलते पुरानी और जर्जर इमारतों में भी अनियंत्रित निर्माण व मरम्मत होती रहती है — जो बार-बार ऐसे हादसों की वजह बन रही है। राहत और बचाव कार्य फिलहाल जारी है। घायल छात्रों के परिजन एम्स के बाहर अपनों की खबर पाने के लिए बेचैन हैं।



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