किसानों को बड़ी राहत: अब ई-टोकन के बिना भी मिलेगा खाद, आधार-खसरा दिखाकर सीधे वितरण शुरू


किसान आंदोलन के बाद सरकार ने लागू की हाइब्रिड व्यवस्था, सर्वर-डाउन और OTP की परेशानी से मिली राहत


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :

खरीफ सीजन के बीच खाद की किल्लत और ई-टोकन व्यवस्था की तकनीकी परेशानियों से जूझ रहे प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने उर्वरक वितरण के लिए हाइब्रिड व्यवस्था लागू कर दी है। अब किसानों को खाद लेने के लिए अनिवार्य रूप से ई-टोकन की ज़रूरत नहीं होगी — आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और जमीन का खसरा दिखाकर सीधे खाद मिल सकेगी। सरकार जल्द ही नियमों में संशोधन कर इस व्यवस्था को स्थायी रूप से लागू करने की तैयारी में है।

सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के बाद समय पर खाद न मिलने की समस्या से जूझ रहे किसानों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तकनीकी कारणों से खाद वितरण नहीं रुकेगा और किसानों को कई दिनों तक इंतज़ार भी नहीं करना पड़ेगा।

आंदोलन के बाद बदली व्यवस्था

प्रदेश में खाद वितरण को लेकर पिछले कई दिनों से किसान लगातार विरोध जता रहे थे। खासकर नर्मदापुरम संभाग समेत प्रदेश भर के किसानों ने भोपाल पहुंचकर प्रदर्शन किया और ई-टोकन प्रणाली की खामियां सरकार के सामने रखीं। किसानों का कहना था कि खाद उपलब्ध होने के बावजूद सिर्फ़ तकनीकी दिक्कतों की वजह से वे समय पर खाद नहीं ले पा रहे थे। बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने तुरंत राहत देते हुए हाइब्रिड व्यवस्था लागू कर दी।

सर्वर डाउन, OTP न आना — बनी थी बड़ी समस्या

अब तक खाद लेने के लिए किसानों को पहले ऑनलाइन ई-टोकन लेना पड़ता था, लेकिन ज़्यादातर इलाकों में सर्वर बार-बार डाउन हो जाता था। कई किसानों के मोबाइल पर OTP नहीं पहुंचता था, तो कई बार स्लॉट ही उपलब्ध नहीं होते थे। नतीजा — किसानों को 10 से 15 दिन तक इंतज़ार करना पड़ता था, बार-बार सोसायटी और सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते थे। समय पर खाद न मिलने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी थी और खेती की लागत भी बढ़ रही थी।

अब कैसे मिलेगा खाद

नई हाइब्रिड व्यवस्था के तहत किसान अपनी सुविधा के मुताबिक नज़दीकी प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स/सोसायटी), डबल लॉक उर्वरक वितरण केंद्र, और अनुबंधित निजी उर्वरक दुकानों से सीधे खाद ले सकेंगे। ई-टोकन उपलब्ध हो तो उसी से वितरण होगा, और अगर टोकन नहीं है तो आधार, मोबाइल नंबर और खसरा के आधार पर भी खाद दिया जाएगा। इससे वितरण प्रक्रिया पहले से ज़्यादा सरल और तेज़ होगी।

नई व्यवस्था में किसानों को सिर्फ़ तीन दस्तावेज़ साथ रखने होंगे — आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, और ज़मीन का खसरा। इनके सत्यापन के बाद सीधे उर्वरक मिल जाएगा।

नियमों में जल्द होगा संशोधन

जिला विपणन अधिकारी स्वाति राय ने बताया कि सरकार ने फिलहाल इस व्यवस्था को राहत के तौर पर लागू किया है। अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही उर्वरक वितरण से जुड़े नियमों में ज़रूरी संशोधन कर हाइब्रिड मॉडल को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा, ताकि आगे भी किसानों को सिर्फ़ तकनीकी वजहों से खाद लेने में परेशानी न हो।



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