जून महीने की शुरुआत के साथ ही कारोबारियों को महंगाई का एक और झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 1 जून 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत बढ़ने की संभावना है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दिल्ली और कोलकाता में बढ़ी कीमतें
नई कीमतों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर 42 रुपये महंगा हो गया है। इसके बाद इसकी कीमत 3,113.50 रुपये पहुंच गई है। वहीं, कोलकाता में इस सिलिंडर की कीमत में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और अब यह 3,255.50 रुपये में उपलब्ध होगा। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर उन व्यवसायों को प्रभावित करेगी जो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गैस का उपयोग करते हैं।
5 किलो FTL सिलिंडर भी हुआ महंगा
कमर्शियल सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब यह सिलिंडर 821.50 रुपये में मिलेगा। छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और फूड स्टॉल संचालकों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
होटल और रेस्तरां सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की कीमतों में वृद्धि से होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और ढाबा व्यवसायों की लागत बढ़ेगी। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कारोबारियों को अपने संचालन खर्च का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है, जिसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
जहां एक ओर व्यवसायिक क्षेत्र पर महंगाई का असर बढ़ा है, वहीं घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत बरकरार है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे करोड़ों परिवारों को तत्काल अतिरिक्त खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या पड़ सकता है व्यापक असर?
एलपीजी कीमतों में बदलाव का असर केवल गैस उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहता। होटल और खाद्य व्यवसायों की लागत बढ़ने पर खाने की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में महंगाई का असर और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल नई दरें 1 जून 2026 से लागू हो चुकी हैं और कारोबारी वर्ग इसकी आर्थिक गणना में जुट गया है।

















