जिले के सरकारी कार्यालयों में आमजन की शिकायत दर्ज कराने के लिए लगाई गई शिकायत पेटियां अब महज़ औपचारिकता बनकर रह गई हैं। पड़ताल में सामने आया कि कई कार्यालयों में शिकायत पेटी है ही नहीं, जबकि जहां लगी है वहां वर्षों से ताले जड़े हैं और कोई शिकायत नहीं मिली। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन और जनसुनवाई की वजह से लोग अब सीधे या डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
शहर के विभिन्न सरकारी कार्यालयों की पड़ताल में सामने आया कि कहीं शिकायत पेटियां वर्षों से खाली पड़ी हैं, कहीं उन पर ताले जंग खा रहे हैं, तो कई कार्यालयों में शिकायत पेटी का कोई नामोनिशान ही नहीं मिला। जो व्यवस्था कभी जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद मानी जाती थी, वह अब केवल दीवार पर टंगी एक निष्क्रिय वस्तु बनकर रह गई है।
शो-पीस बनकर रह गई शिकायत पेटी
कृषि विभाग कार्यालय में शिकायत पेटी तो लगी है, लेकिन उस पर “शिकायत पेटी” तक नहीं लिखा है। विभाग के मुताबिक इसमें आख़िरी शिकायत कब आई थी, यह किसी को पता नहीं — तब से पेटी खाली है। खनिज विभाग में पेटी लगी है, पर उसका ताला कब खुला यह भी अस्पष्ट है। जनजाति विभाग में पेटी थी ही नहीं, जबकि यहां जिले भर के हज़ारों शिक्षकों का आना-जाना रहता है। पशु विभाग में पूरे सत्र में एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई — अधिकारियों का कहना है कि छोटी-मोटी समस्याएं लोग सीधे आकर बता देते हैं। जिला अस्पताल में शिकायत पेटी नियमित खोली तो जाती है, पर लंबे समय से उसमें कोई शिकायत नहीं मिली — सिविल सर्जन हर हफ़्ते इसकी समीक्षा करते हैं।
“कल ही लगा देंगे” — अधिकारियों का जवाब
वन विभाग के जिला कार्यालय में शिकायत पेटी न होने की बात सामने आने पर DFO विजयानंतम टीआर से बात की गई, उन्होंने कहा कि कल ही शिकायत पेटी लगा दी जाएगी। कलेक्टर कार्यालय और मुख्यालय में भी शिकायत पेटी न होने पर कलेक्टर राजीव रंजन मीना से चर्चा हुई — उन्होंने माना कि कई दफ़्तरों में यह वर्षों से बंद पड़ी है, और जल्द नई शिकायत पेटियां लगाई जाएंगी ताकि आमजन को शिकायत दर्ज कराने का सीधा और प्रभावी माध्यम मिल सके।
गोपनीय शिकायत का क्या हाल
नगर पालिका, आईएस विभाग, DPC और आबकारी जैसे जनता से सीधे जुड़े दफ़्तरों में शिकायत पेटी मिली ही नहीं। मत्स्य विभाग, शिक्षा विभाग और जनपद में पेटी थी, पर देखरेख के अभाव में उपेक्षित हालत में। कुछ विभागों में तो सालों से पेटी के ताले तक नहीं खुले। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें सीधे सुनकर डायरी में दर्ज की जाती हैं और ज़रूरी कार्रवाई होती है, और शासन के नियमानुसार जल्द शिकायत पेटियां लगाई जाएंगी।
SP और जिला पंचायत में मिली सुचारू व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में शिकायत पेटी सुचारू रूप से संचालित मिली, जिला पंचायत में भी यह व्यवस्थित हालत में पाई गई। निरीक्षण में पता चला कि यहां प्राप्त शिकायतों की समय-समय पर समीक्षा कर ज़रूरी कार्रवाई की जाती है — यानी जहां निगरानी है, वहां व्यवस्था असरदार भी है।
फैक्ट बॉक्स: शिकायत पेटी क्यों ज़रूरी है
सभी सरकारी कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाना अनिवार्य है
इसे प्रवेश द्वार या स्वागत कक्ष जैसी प्रमुख जगह पर लगाया जाना चाहिए
शिकायत नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ लिखित रूप में डाली जाती है
नोडल अधिकारी हर हफ़्ते पेटी खोलकर शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करता है
गोपनीयता के अनुरोध पर शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रखी जाती है
बिना नाम-पते की शिकायतों पर सामान्यतः कार्रवाई नहीं होती
शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेज़ों की प्रतियां जोड़ना ज़रूरी माना जाता है
















