नदी में दूषित जल छोड़ने का मामला: नर्मदा शुगर मिल के 6 निदेशक और महाप्रबंधक दोषी, प्रत्येक पर ₹25 हजार का जुर्माना


गाडरवारा की अदालत ने नदी में दूषित जल छोड़ने के मामले में नर्मदा शुगर मिल के छह निदेशकों और महाप्रबंधक को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर ₹25 हजार का जुर्माना लगाया।


ब्रजेश शर्मा ब्रजेश शर्मा
नरसिंहपुर Published On :

गाडरवारा स्थित नर्मदा शुगर मिल द्वारा कारखाने से निकलने वाले दूषित जल को नाले के माध्यम से नदी में प्रवाहित करने के मामले में अदालत ने मिल प्रबंधन को दोषी ठहराया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) गाडरवारा की अदालत ने मिल के छह निदेशकों और महाप्रबंधक पर प्रत्येक ₹25 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में सभी दोषियों को तीन-तीन महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।

 

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अजय सिंह यादव की अदालत ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाम नर्मदा शुगर मिल प्रकरण में यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि शुगर मिल द्वारा शुगर और एथेनॉल उत्पादन के दौरान निकलने वाले दूषित जल का समुचित उपचार नहीं किया गया और उसे नाले के माध्यम से नदी में छोड़ा गया, जिससे जल प्रदूषण हुआ।

 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2021 में दर्ज कराया था मामला

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 27 अगस्त 2021 को अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया था। बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, नर्मदा शुगर मिल से निकलने वाला अनुपचारित दूषित जल बगहा नाला के रास्ते लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम धनोरा स्थित उमर नदी में मिल रहा था।

 

रिपोर्ट में कहा गया कि मिल का अपशिष्ट जल प्रभावी ढंग से उपचारित नहीं किया जा रहा था, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा था। मामले की जांच के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों ने विधि अनुसार जल के नमूने एकत्र किए और उनकी जांच कराई। जांच रिपोर्ट में प्रदूषण की पुष्टि होने के बाद अदालत ने इसे अपराध सिद्ध माना।

 

इन लोगों को ठहराया गया दोषी

अदालत ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 43 और 44 के तहत नर्मदा शुगर मिल के निदेशक विनीत माहेश्वरी, नवनीत माहेश्वरी, राजेश माहेश्वरी, विवेक माहेश्वरी, अशोक माहेश्वरी, किशोर कुमार माहेश्वरी तथा महाप्रबंधक ए.के. पाल को दोषी ठहराया।

सभी दोषियों पर प्रत्येक ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माना जमा नहीं करने पर प्रत्येक दोषी को तीन महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।



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