चीचली नगर परिषद अध्यक्ष शेख मंसूर को फिर कारण बताओ नोटिस, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर बढ़ा विवाद


नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने चीचली नगर परिषद अध्यक्ष शेख मंसूर को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने कई योजनाओं की राशि के उपयोग और स्ट्रीट लाइट खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।


ब्रजेश शर्मा ब्रजेश शर्मा
नरसिंहपुर Published On :

चीचली/नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले की चीचली नगर परिषद के अध्यक्ष शेख मंसूर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग, भोपाल द्वारा जारी एक नए कारण बताओ नोटिस में उन्हें विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया है। विभाग ने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि परिषद और राज्य शासन के हितों को देखते हुए उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना उचित प्रतीत नहीं होता। साथ ही यह भी पूछा गया है कि उनके विरुद्ध संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

 

वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी का आरोप

विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस में कई गंभीर बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि एसडीएमएफ योजना के अंतर्गत 22 मार्च 2024 को नगर परिषद के खाते में 1 करोड़ 31 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन जांच के दौरान इस राशि की पूर्ण प्रविष्टि बैंक अभिलेखों में नहीं मिली। विभाग के अनुसार इस मद से किसी प्रकार का भुगतान भी दर्ज नहीं हुआ, जबकि 13 जून 2024 तक खाते में मात्र 4 लाख 72 हजार 250 रुपये शेष पाए गए। इससे राशि के उपयोग और लेखा-जोखा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

कायाकल्प योजना की राशि पर भी सवाल

नोटिस में योजना कायाकल्प 2.0 के तहत प्राप्त धनराशि का भी उल्लेख किया गया है। विभाग के अनुसार पहली किश्त के रूप में 31 जुलाई 2024 को 10 लाख रुपये और दूसरी किश्त के रूप में 30 अक्टूबर 2024 को 20 लाख रुपये नगर परिषद को उपलब्ध कराए गए थे। कुल 30 लाख रुपये की इस राशि के संबंध में जांच में पाया गया कि 30 दिसंबर 2024 तक किसी वैध भुगतान का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, फिर भी खाते में केवल 2 लाख 15 हजार 806 रुपये ही शेष मिले।

 

विभाग का कहना है कि इस खाते से राशि का संचालन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से होता है, इसलिए दोनों की भूमिका की जांच आवश्यक है। नोटिस में दोनों अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ की आशंका भी व्यक्त की गई है।

 

स्ट्रीट लाइट परियोजना में अनियमित खरीद का आरोप

गोटीटोरिया मार्ग पर स्थापित की गई स्ट्रीट लाइट परियोजना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 90 पोलों पर प्रकाश व्यवस्था स्थापित की जानी थी, जिसके लिए अनुमानित रूप से 3000 मीटर केबल की आवश्यकता थी। हालांकि खरीद रिकॉर्ड में इससे कहीं अधिक मात्रा में केबल खरीदे जाने का उल्लेख मिला है।

इसके अलावा आरोप लगाया गया है कि सामग्री की खरीद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। न्यूनतम दरों को परिषद से अनुमोदित नहीं कराया गया, कुछ उत्पादों के ब्रांड बदले गए तथा आरमेड केबल और एचडीपीई पाइप जैसी सामग्रियों की खरीद अपेक्षाकृत अधिक दरों पर की गई। विभाग का दावा है कि इससे वित्तीय नुकसान की संभावना बनी है।

 

विभाग ने मांगा जवाब

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नोटिस में अध्यक्ष से निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई, आर्थिक वसूली और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

 

अध्यक्ष शेख मंसूर ने आरोपों को बताया दुर्भावनापूर्ण

दूसरी ओर नगर परिषद अध्यक्ष शेख मंसूर ने सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनावश बताया है। उनका कहना है कि उन्हें धारा 41 के तहत यह दूसरा नोटिस मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

शेख मंसूर के अनुसार विभिन्न योजनाओं के तहत प्राप्त राशि का व्यय सीएमओ और लेखा शाखा द्वारा किया जाता है तथा अध्यक्ष के रूप में उनके केवल हस्ताक्षर होते हैं। उन्होंने कहा कि कई नगर निकायों में एक मद की राशि का उपयोग दूसरे आवश्यक कार्यों में किया जाता रहा है और चीचली में भी नगरहित के कार्य ही किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी कार्य जनता की सुविधा और विकास को ध्यान में रखकर किए गए हैं।

अब इस मामले में विभाग द्वारा मांगे गए जवाब और आगामी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला चीचली नगर परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।SEO कीवर्ड्स: चीचली नगर परिषद, शेख मंसूर, कारण बताओ नोटिस, वित्तीय अनियमितता, नगरीय विकास विभाग, नरसिंहपुर समाचार, नगर परिषद चीचली, स्ट्रीट लाइट घोटाला, कायाकल्प योजना, एसडीएमएफ योजना।



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