लोकायुक्त की लगातार ट्रैप कार्रवाई के बावजूद धार जिले में रिश्वतखोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। पिछले एक साल में जिले के एक दर्जन से अधिक सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी दफ्तरों में फाइलों की मंजूरी, बिल भुगतान, ठेकों, पेंशन, जीपीएफ और अन्य प्रशासनिक कामों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
लगातार हो रही कार्रवाई के बाद भी व्यवस्था में डर का माहौल नहीं बन पाया है। हर कुछ सप्ताह में किसी न किसी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई की खबर सामने आती है, लेकिन इससे भ्रष्टाचार पर निर्णायक असर दिखाई नहीं दे रहा।
सरकारी दफ्तरों में रिश्वत की शिकायतें जारी
सूत्रों के अनुसार कई विभागों में ठेकों के भुगतान, बिल पास कराने और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कमीशन मांगने की शिकायतें मिलती रही हैं। समयमान, एरियर, जीपीएफ, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामलों में भी काम जल्दी कराने के बदले पैसे मांगने के आरोप सामने आते रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे और जमीनी सवाल
केंद्र सरकार लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” जैसे नारों पर जोर देती रही है। बाद के वर्षों में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी नीति की सफलता या असफलता का आकलन केवल एक जिले की घटनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि केवल ट्रैप कार्रवाई से भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता। इसके लिए आवश्यक है कि—
सरकारी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी हों।
जवाबदेही तय की जाए।
शिकायतों का त्वरित निपटारा हो।
दोषी पाए जाने पर समयबद्ध सजा सुनिश्चित हो।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हाल के वर्षों में लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए पहले की तुलना में अधिक आगे आ रहे हैं, जिससे कई मामलों का खुलासा संभव हो पा रहा है।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ सकती है कानूनी सख्ती
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार हाल के एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले के बाद रिश्वत के मामलों में कानूनी कार्रवाई और सख्त हो सकती है। अब केवल रिश्वत लेने का आरोप ही नहीं, बल्कि अवैध संपत्ति अर्जित करने से जुड़े प्रावधान भी लागू किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर सजा का दायरा बढ़ सकता है।
इंदौर संभाग के 28 मामलों की समीक्षा
लोकायुक्त ने इंदौर संभाग के 28 मामलों को चिह्नित किया है, जिनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। धार जिले के भी 11 से अधिक मामलों की समीक्षा की जा रही है। लोकायुक्त के अनुसार जिन मामलों में पहले चालान पेश हो चुके हैं, उनमें नई कानूनी धाराएं जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन किए जा रहे हैं।
बड़ा सवाल
लगातार ट्रैप कार्रवाई, बढ़ती शिकायतों और सख्त कानूनी प्रावधानों के बावजूद रिश्वतखोरी क्यों नहीं रुक रही? क्या केवल कार्रवाई पर्याप्त है, या फिर प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की जरूरत है? यही सवाल आज भी व्यवस्था के सामने खड़ा है।














