आजादी के बाद जिस पल का इंतजार टांडा और आसपास के आदिवासी अंचल के लोग दशकों से कर रहे थे, वह अब हकीकत में बदल गया है। पिछले दिनों टांडा रेलवे स्टेशन पर पहली बार रेल की सीटी गूंजी और 12 कोच की मेमू ट्रेन पटरियों पर दौड़ती हुई यहां पहुंची। प्रतापनगर-वडोदरा से आई इस ट्रेन को देखने के लिए स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। ट्रेन को निहारती आंखों में वर्षों का इंतजार और क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद साफ नजर आई। प्रतापनगर से सुबह करीब 5 बजे रवाना हुई मेमू ट्रेन सुबह 10.30 बजे टांडा रोड पहुंची। बहुप्रतीक्षित छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के तहत डेकाकुंड से टांडा रोड तक बिछाए गए नए रेलखंड पर यह पहला महत्वपूर्ण ट्रायल रहा। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण में हरी झंडी मिलने के बाद अब 8 सितंबर से नियमित यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में रेलवे ने कदम बढ़ा दिए हैं।
ट्रेन आने की खुशी में ग्रामीणों में उत्साह
टांडा रोड स्टेशन के लिए यह दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है। अब ट्रेन नए ट्रैक पर दौड़ती हुई टांडा स्टेशन आएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर टांडा रोड स्टेशन से वडोदरा (प्रतापनगर) के बीच नई ट्रेन सेवा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर टांडा पहुंचकर आयोजन में भाग लेंगी। अब तक रेल को सिर्फ दूसरे शहरों में देखने वाले क्षेत्रवासियों के सामने पहली बार अपने इलाके में ट्रेन खड़ी होगी। इसे आदिवासी अंचल के लिए विकास, रोजगार और बेहतर कनेक्टिविटी की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
सुबह टांडा आएगी, शाम को गुजरात लौटेगी
पिछले दिनों रेलवे द्वारा शुरुआती दौर में दो बार ट्रेन का ट्रायल किया गया था, जिसके शेड्यूल के अनुसार मेमू ट्रेन प्रतापनगर से सुबह करीब 5 बजे रवाना होकर अलीराजपुर के जोबट होते हुए करीब 9.35 बजे टांडा रोड पहुंचेगी। इसके बाद ट्रेन दिनभर टांडा रोड स्टेशन पर खड़ी रहेगी और शाम करीब 5 बजे प्रतापनगर के लिए रवाना होगी। वापसी में यह रात करीब 9.25 बजे प्रतापनगर पहुंचेगी। नए रेलखंड पर ट्रेन की अधिकतम गति करीब 100 किमी प्रति घंटे रखी गई है। यात्री सेवा शुरू होने के बाद टांडा सीधे गुजरात के रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
435 करोड़ में बना 16 किमी नया ट्रैक
पश्चिम रेलवे, वडोदरा मंडल के पीआरओ अनुपम सक्सेना के अनुसार छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना की कुल लागत करीब 3900 करोड़ रुपए है। डेकाकुंड से टांडा रोड तक 16 किमी रेलखंड के निर्माण पर करीब 435 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। नए ट्रैक पर मेमू का ट्रायल पूरा होने के बाद क्षेत्र में नियमित यात्री ट्रेन की उम्मीद और मजबूत हुई है। टांडा के साथ अलीराजपुर और आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गुजरात से सीधा जुड़ाव, खुलेंगे विकास के रास्ते
रेल सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मिलेगा। टांडा और आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार, शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए गुजरात की ओर आवागमन में सुविधा होगी। आजादी के बाद पहली बार जिले में स्थाई रूप से रेल पटरी पर दौड़ेगी, जिससे लोगों में एक अलग ही उत्साह नजर आ रहा है। छुक-छुक की आवाज के साथ न सिर्फ इलाके की तस्वीर बदलेगी, बल्कि लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से बेहतर जुड़ाव का इंतजार कर रहे आदिवासी अंचल में नई उम्मीद भी जगी है। पटरियों पर दौड़ी यह ट्रेन आने वाले दिनों में टांडा की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने वाली कड़ी साबित हो सकती है।
टांडा-अलीराजपुर मेमू ट्रेन 8 सितंबर से, पीएम वर्चुअल जुड़ेंगे
टांडा क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना रेल सुविधा का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। नए रेलखंड पर यात्री रेल सेवा शुरू होने की तारीख तय हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 सितंबर को गुजरात दौरे के दौरान वहीं से वर्चुअल माध्यम से टांडा रोड-अलीराजपुर रेल सेवा का लोकार्पण करेंगे। इसी के साथ टांडा रोड क्षेत्र नियमित यात्री रेल सेवा से जुड़ जाएगा। लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान धार जिले के टांडा रोड रेलवे स्टेशन पर केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर मौजूद रहेंगी। पश्चिम रेलवे की ओर से नए रेलखंड पर यात्री ट्रेन संचालन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रेल संरक्षा आयुक्त की मंजूरी के बाद यात्री सेवा संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, और अब 8 सितंबर को इसका औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इससे लंबे समय से रेल सुविधा की मांग कर रहे टांडा सहित आसपास के क्षेत्र के लोगों में उत्साह है।
फैक्ट फाइल
- 3900 करोड़ रुपए — परियोजना की कुल लागत
- 147 किमी — छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना की कुल लंबाई
- 101 किमी — तैयार रेलखंड, जिस पर ट्रेन संचालन की दिशा में काम
- 16 किमी — डेकाकुंड से टांडा रोड तक नया ट्रैक
- 435 करोड़ रुपए — डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड की लागत
- 46 किमी — टांडा से तिरला-धार तक काम शेष
आदिवासी क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
दशकों बाद रेल कनेक्टिविटी मिलने से आदिवासी क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलेगी। बेहतर परिवहन सुविधा से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, और रेल सेवा शुरू होने से आदिवासी अंचल में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। युवाओं को शिक्षा और नौकरी के लिए बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी। किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं में भी रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।
(सावित्री ठाकुर, केंद्रीय राज्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार)
















