विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बेतवा नदी के स्टॉप डैम पर जान जोखिम में डालकर छलांग लगाते हुए स्कूल जाने को मजबूर बच्चों का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने त्वरित फैसला लिया है। बंधेरा गांव के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नत कर दिया गया है, और बुधवार से यहां कक्षा 9वीं और 10वीं की पढ़ाई भी शुरू हो गई। इस फैसले से ककरुआ समेत आसपास के गांवों के बच्चों को अब नदी पार कर दूसरे गांव के स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।
चार फीट का गैप, हर दिन जान का जोखिम
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में बंधेरा, ककरुआ, इमलिया और बेहलोट गांवों के स्कूली बच्चे बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के खुले पिलरों पर संतुलन बनाते और बीच के गैप को छलांग लगाकर पार करते नजर आए।
दरअसल ककरुआ गांव में सिर्फ आठवीं तक स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को पलोह गांव के हाई स्कूल जाना पड़ता था — सड़क मार्ग से यह दूरी करीब 13-15 किलोमीटर एक तरफ, यानी आना-जाना मिलाकर करीब 30 किलोमीटर। वहीं स्टॉप डैम के रास्ते यह दूरी सिमटकर डेढ़ से पांच किलोमीटर रह जाती थी। कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते ज़्यादातर परिवार रोज वाहन का इंतज़ाम नहीं कर पाते, इसलिए बच्चे मजबूरी में इसी खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल करते थे।
स्टॉप डैम के बीच करीब चार फीट का गैप है, जिसे बच्चे कूदकर पार करते थे। मानसून में जब डैम के ऊपर पानी बहता और पिलर फिसलन भरे हो जाते, तब खतरा कई गुना बढ़ जाता। ककरुआ के दो, इमलिया के दो और बंधेरा के पांच — कुल नौ बच्चे रोज इसी रास्ते से पलोह स्कूल पहुंचते थे। ग्रामीणों के मुताबिक इस डर की वजह से कई बच्चों ने आठवीं के बाद पढ़ाई ही छोड़ दी। कुछ साल पहले ग्राम पंचायत ने यहां हाई स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
प्रशासन सक्रिय, हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान
वीडियो वायरल होने के बाद विदिशा के एसडीएम क्षितिज शर्मा तहसीलदार और अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण में अधिकारियों ने माना कि बच्चों की जान खतरे में है, जिसके बाद प्रशासन ने स्टॉप डैम के रास्ते पर कंटीली झाड़ियां और तार लगाकर आवागमन रोक दिया — हालांकि इससे कई बच्चे स्कूल भी नहीं पहुंच पाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने दो मांगें रखीं: बंधेरा के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में अपग्रेड किया जाए, और स्टॉप डैम की जगह स्थायी पुल बनाया जाए। मामले की गंभीरता देखते हुए हाई कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया और न्यायाधीशों की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्टॉप डैम व बच्चों के आवागमन मार्ग का निरीक्षण किया। टीम अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेगी, जिसके आधार पर सुरक्षित आवागमन को लेकर आगे निर्देश जारी हो सकते हैं।
बुधवार से शुरू हुई पढ़ाई
जिला शिक्षा अधिकारी एन.के. अहिरवार ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय से उन्नयन का आदेश मिलते ही दो शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी गई है। बुधवार से बंधेरा में ही कक्षा 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू हो गई। रोजगार सहायक विष्णु शर्मा के मुताबिक इस फैसले से न सिर्फ ककरुआ, बल्कि आसपास के सात गांवों के विद्यार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा — अब उन्हें पढ़ाई के लिए जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी। स्थायी पुल की मांग पर प्रशासन का फैसला अभी बाकी है।


























