इंदौर। समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े अभियान या बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार अपने आसपास की जरूरत को समझकर शुरू की गई छोटी-सी पहल भी लंबे समय में बड़ा असर छोड़ती है। ऐसे ही जमीनी स्तर पर काम कर रहे देशभर के 27 लोगों को ‘गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स–सीजन 3’ में सम्मानित किया गया।
सतत विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता और सामाजिक पहल को बढ़ावा देने वाली संस्था ‘2030_का_भारत’ की ओर से आयोजित इस पहल में तीन श्रेणियों—एजुकेशन, सरप्लस फूड डिस्ट्रीब्यूशन और इको वॉरियर—में काम कर रहे लोगों को सम्मान दिया गया।
सोमवार को आयोजित वर्चुअल मीट में सभी सम्मानित लोग एक साथ जुड़े। उन्होंने अपने काम की शुरुआत, सामने आई चुनौतियों और समाज के लिए काम करने की अपनी प्रेरणा साझा की। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों से जुड़े इन लोगों की कहानियों ने यह दिखाया कि सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत स्तर पर किए गए प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘2030_का_भारत’ के फाउंडर डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि इन 27 लोगों की कहानियां बताती हैं कि समाज के लिए काम करने के लिए किसी बड़े पद या बड़े संसाधन की जरूरत नहीं होती। अपने आसपास की जरूरतों को समझकर पहल करना ही बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
शिक्षा से जोड़ रहे वंचित बच्चों को
एजुकेशन कैटेगरी में ऐसे लोगों को सम्मानित किया गया, जो पेशेवर शिक्षक नहीं हैं, लेकिन अपने समय का एक हिस्सा जरूरतमंद और वंचित बच्चों की पढ़ाई के लिए दे रहे हैं।
इस श्रेणी में इंदौर के संजय सावरे के साथ दिल्ली के थान सिंह, गाजियाबाद के डॉ. नीलेश सिंह, लुधियाना के एडवोकेट हरिओम जिंदल, उत्तराखंड की लता गहतोडी, बिहार के कुंदन कुमार, बिलासपुर के आशीष कुमार खंडेलवाल, रांची के विकास करण और मुंबई के अब्दुल मुनाफ को सम्मान मिला।
इनकी पहल का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक
सरप्लस फूड डिस्ट्रीब्यूशन कैटेगरी में उन लोगों को सम्मानित किया गया, जो अतिरिक्त या बचा हुआ भोजन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाकर भोजन की बर्बादी कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस श्रेणी में नागदा के कबीर, झांसी के यमन श्रीवास्तव, जयपुर के भवानी सिंह शेखावत और ऋषभ जैन, रायपुर के नितिन सिंह राजपूत, रांची के दीपांशु कुमार, पटना के संतोष सुमन, देहरादून की जसलीन कौर, मुंबई की निधि सिंघई और लुधियाना के परमजीत सिंह शामिल हैं।
पर्यावरण के लिए अलग-अलग मोर्चों पर काम
इको वॉरियर कैटेगरी में पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के लिए काम कर रहे लोगों को सम्मानित किया गया। इनमें बैतूल के बांचा गांव के मोहन नगर, अयोध्या के पुरुषोत्तम पांडे, बोकारो के दांतू गांव की अपर्णा कुमारी, देहरादून के संजय टेहरी, बीकानेर के मोती लाल, बिलासपुर के भूपेश वैष्णव, खंडवा के चेतन सिंह सोलंकी और मुंबई के डॉ. सचिन शिगवान शामिल हैं।
ये लोग स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं।
गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स के इस संस्करण में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए इन लोगों को एक साझा मंच मिला। इनकी पहल यह बताती है कि बदलाव की शुरुआत हमेशा किसी बड़े संस्थान या बड़े अभियान से नहीं होती। अपने आसपास की किसी समस्या को पहचानकर उसके समाधान के लिए उठाया गया एक कदम भी बदलाव की नींव बन सकता है।




























