खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले जिले के किसानों के सामने सोयाबीन बीज का संकट गहराता जा रहा है। पिछले वर्ष सोयाबीन के बेहतर दाम मिलने के बाद इस बार किसान बड़े पैमाने पर इसकी बोवनी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन प्रमाणित बीज की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि कई इलाकों में सोयाबीन बीज के दाम 10 हजार से 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। वहीं बाजार में अप्रमाणिक और बिना प्रमाणित बीज की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि बीज की उपलब्धता कम होने के कारण उन्हें मजबूरी में ऊंचे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि अप्रमाणिक बीज का उपयोग अंकुरण क्षमता को प्रभावित कर सकता है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
किसान ही किसानों से जुटा रहे बीज
मानसून की दस्तक के साथ किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन प्रमाणित सोयाबीन बीज की कमी बड़ी चुनौती बन गई है। कई क्षेत्रों में बीज विक्रेताओं के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिसके चलते किसान गांव-गांव जाकर अन्य किसानों से बीज जुटाने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर पर्याप्त बीज उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि ऐसे बीजों की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता की कोई गारंटी नहीं होती। मांग बढ़ने और उपलब्धता घटने से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
2303 और 2433 किस्म के बीज सबसे महंगे
जानकारी के अनुसार इस वर्ष 2303 और 2433 किस्म के सोयाबीन बीज की मांग सबसे अधिक है। इन किस्मों के बीज 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। किसानों का मानना है कि इन किस्मों की चमक अच्छी रहती है और फसल लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है।
यही कारण है कि किसान 120 दिनों में तैयार होने वाली पारंपरिक किस्मों की तुलना में कम अवधि वाली किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में वर्तमान में 10 से 15 किस्मों के सोयाबीन बीज उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें किस्म के अनुसार अलग-अलग हैं।
नई किस्मों में 268, 2433, 2506, 2303, 150, 2172, 2117 और 2555 की मांग सबसे ज्यादा बताई जा रही है। किसानों का आरोप है कि निजी विक्रेता मनमाने दामों पर बीज बेच रहे हैं और मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
जरूरत और उपलब्धता के बीच बढ़ा अंतर
जिले में हर वर्ष लगभग 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोवाई होती है। कुछ किसान पिछले वर्ष का बीज सुरक्षित रख लेते हैं, जबकि कई किसान नई किस्मों की ओर रुख करते हैं। इस बार किसानों ने पुराने बीज का अंकुरण परीक्षण किया तो कई जगह परिणाम संतोषजनक नहीं मिले। इसके चलते बड़ी संख्या में किसान नए बीज खरीदने के लिए बाजार की ओर पहुंचे हैं।
बीज की बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता के कारण किसानों को महंगे दामों पर खरीदारी करनी पड़ रही है। कई स्थानों पर किसान आपस में बीजों की अदला-बदली भी कर रहे हैं। वहीं आरोप हैं कि कुछ तथाकथित बीज कारोबारी और बिचौलिए पहले से ही स्टॉक जमा कर ऊंचे दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
नकली बीज का कारोबार भी तेज
प्रमाणित बीज की कमी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी बिना प्रमाणन और संदिग्ध गुणवत्ता वाले बीज बाजार में बेच रहे हैं। इससे किसानों के सामने फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिना बिल और प्रमाणपत्र के खरीदे गए बीजों की जांच और शिकायतों के समाधान में भी कठिनाई आती है। ऐसे में किसान नुकसान होने पर अपने दावे भी साबित नहीं कर पाते।
जून के आखिरी सप्ताह में बढ़ेगी मांग
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिले में 25 जून के आसपास मानसून की अनुकूल बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बोवनी का कार्य तेजी पकड़ेगा और बीज की मांग और बढ़ जाएगी। हालांकि बाजार में अभी से सोयाबीन बीज की कमी महसूस की जा रही है।
बीज कंपनियां और व्यापारी अन्य राज्यों से बीज मंगाकर आपूर्ति करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मांग के मुकाबले उपलब्धता अभी भी कम है। मंडियों में सोयाबीन बीज 9 हजार से 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।
कई कारोबारी मंडियों से सोयाबीन खरीदकर किसानों को बीज के रूप में बेच रहे हैं। ऐसे बीजों के साथ न तो प्रमाणिकता का प्रमाणपत्र दिया जा रहा है और न ही पक्का बिल। यही कारण है कि कृषि विभाग भी ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने में कठिनाई महसूस कर रहा है।
खरीफ सीजन से पहले सोयाबीन बीज की कमी, बढ़ती कीमतें और नकली बीजों का खतरा किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते पर्याप्त प्रमाणित बीज उपलब्ध नहीं कराए गए, तो इसका असर उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर पड़ सकता है।















