भोपाल। अच्छी सेहत किसी एक उपाय से नहीं मिलती। इसके लिए खान-पान, दिनचर्या, मानसिक संतुलन और आसपास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की समझ, सब साथ चलने चाहिए। बुधवार को भोपाल में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘गुड हेल्थ, गुड लाइफ’ में अलग-अलग क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों की बातचीत का सार यही रहा।
संगोष्ठी शिक्षाविद और समाजसेवी स्व. आनंद स्वरूप मिश्र की जन्म जयंती पर आयोजित की गई। इसका आयोजन नेचुरल रिसोर्सेज कंजर्वेशन एंड लाइवलीहुड सोसाइटी (NRCLS), भोपाल और आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन (APPHF India) ने मिलकर किया।
पहले याद, फिर बात
कार्यक्रम की शुरुआत स्व. आनंद स्वरूप मिश्र को याद करने से हुई। उनकी पुत्री और डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय (BRAUSS), महू की पूर्व कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने उनके जीवन, सादगी भरी जीवनशैली और शिक्षा व समाज के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में बताया। इसके बाद NRCLS के निदेशक और BRAUSS के पूर्व पीठ आचार्य डॉ. देबाशीष देबनाथ ने संगोष्ठी का विषय रखा। उनका कहना था कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और संतुलित दिनचर्या ही ज़िम्मेदार जीवन की शुरुआत है।
तनाव से लेकर उपवास तक
भारतीय वन प्रबंध संस्थान (IIFM), भोपाल की प्रोफेसर डॉ. पारुल ऋषि ने तनाव प्रबंधन पर बात की और बताया कि मन का तनाव शरीर की सेहत पर कैसे असर डालता है। स्वतंत्र स्वास्थ्य कार्यकर्ता विजय कुमार शर्मा ने इंटरमिटेंट फास्टिंग, यानी तय अंतराल पर भोजन करने के तरीके, के बारे में जानकारी दी। SAM ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भोपाल की प्रोफेसर डॉ. मलिका पाल ने भोजन और पोषण के महत्व पर अपनी बात रखी।
महू से भी पहुंची आवाज़
BRAUSS, महू की विभागाध्यक्ष और डीन डॉ. मनीषा सक्सेना ने कहा कि संतुलित आहार के साथ प्रसन्न रहना भी अच्छी सेहत का बड़ा हिस्सा है। वैज्ञानिक और जैव विविधता प्रबंधन सलाहकार डॉ. सुशील उपाध्याय ने लोक औषधियों की बात की। उन्होंने बताया कि गांवों और जंगलों में पीढ़ियों से इस्तेमाल हो रही जड़ी-बूटियां और घरेलू नुस्खे सेहत बनाए रखने में आज भी काम के हैं।
पारंपरिक ज्ञान पर ज़ोर
अध्यक्षता करते हुए प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि स्वस्थ समाज बनाने के लिए जागरूकता, सकारात्मक जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान, तीनों को साथ लेकर चलना होगा। अंत में लव चावड़ीकर ने सभी का आभार जताया।



























