धार जिले में जंगल की आग पर विभागीय लापरवाही, वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा


धार जिले के धामनोद-मांडू क्षेत्र में जंगल में लगी आग से वन्य जीवों पर खतरा बढ़ा। कई दिनों से धधक रही आग पर वन विभाग की लापरवाही सामने आई


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :

मध्यप्रदेश के धार जिले में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जंगलों में आग ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। धामनोद और मांडू क्षेत्र के आसपास पिछले कई दिनों से धधक रही आग ने न केवल हरे-भरे जंगलों को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरी स्थिति में वन विभाग की लापरवाही और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी लगातार सवालों के घेरे में है।

धार जिले के धामनोद-मांडू क्षेत्र में पिछले करीब एक सप्ताह से जंगलों में आग लगातार फैल रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार नीलकंठ महादेव मंदिर के सामने खाई में लगी आग धीरे-धीरे पहाड़ी इलाकों तक पहुंच गई और अब यह सोनगढ़ किला और तारापुर घाट की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है। रात के समय इन क्षेत्रों में आग की लपटें साफ दिखाई दे रही हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी खतरा बढ़ गया है।

गर्मी के दिनों में जंगलों में सूखे पत्तों की भरमार रहती है और पानी के स्रोत भी सीमित हो जाते हैं। ऐसे में आग तेजी से फैलती है। यही स्थिति इस समय धामनोद और मांडू क्षेत्र में देखने को मिल रही है। वन्य जीव पानी और सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगल छोड़कर आबादी की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों और राहगीरों ने बताया कि शाम ढलते ही जंगल में आग की लपटें तेज हो जाती हैं और दूर से धुआं दिखाई देता है। मांडू-धरमपुरी मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों ने भी इस गंभीर स्थिति के फोटो और जानकारी साझा की है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

सबसे बड़ा सवाल विभागीय कर्मचारियों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। एक ओर जहां डीएफओ स्तर पर जंगल बचाने के लिए नवाचार और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर कर्मचारी नदारद नजर आ रहे हैं। कई बीट क्षेत्रों में कर्मचारी मौजूद नहीं रहते, जिससे अवैध गतिविधियों और आगजनी जैसी घटनाओं पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, कई बार जंगल में आग जानबूझकर लगाई जाती है ताकि पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाकर जमीन पर कब्जा किया जा सके। यह अतिक्रमण की एक पुरानी रणनीति है, जिसे हर साल दोहराया जाता है। पिछले वर्ष वन विभाग ने करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया था, लेकिन इस साल फिर से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

धार जिले में लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र फैला हुआ है, जिसमें तेंदुए सहित कई दुर्लभ वन्य जीव निवास करते हैं। आग की घटनाओं से इन जीवों के जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद विभाग के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम। पानी की कमी और सूचना तंत्र की कमजोरी भी आग पर काबू पाने में बड़ी बाधा बन रही है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा समितियों और फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं तथा आग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है, जहां कई दिनों से जल रही आग पर अब तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।



Related