देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से 21 लोगों की मौत ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के खिलाफ रविवार को इंदौर की सड़कों पर कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ निकली, जिसमें प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बड़ा गणपति चौराहे से शुरू हुई यह यात्रा राजवाड़ा स्थित देवी अहिल्या की प्रतिमा पर समाप्त हुई। कांग्रेस ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की लड़ाई बताया।
भागीरथपुरा इलाके में गंदे पानी के कारण हुई मौतों के विरोध में निकली इस न्याय यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक जयवर्धन सिंह समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता, महिला कांग्रेस और सेवादल के सदस्य शामिल हुए।
यात्रा की शुरुआत मौन रैली के रूप में की गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर हाथों में तिरंगा लिया और नगर निगम व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। खास तौर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग को लेकर माहौल गर्म रहा।
न्याय यात्रा के दौरान एक प्रतीकात्मक दृश्य भी देखने को मिला, जब दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार चलती गाड़ी की छत पर चढ़कर जनता को संबोधित करते नजर आए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इंदौर में पार्षद से लेकर संसद तक भाजपा का कब्जा है, इसके बावजूद जनता को साफ पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और कांग्रेस अब घर-घर जाकर लोगों से संवाद करेगी।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर आंकड़े छुपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी शहर के कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। सिंघार ने दो टूक कहा कि साफ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि जनता का मौलिक अधिकार है।
पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शहर को लगातार देश का नंबर-वन स्वच्छ शहर बताया गया, वहां ऐसी घटना पूरे सिस्टम पर कलंक है। उन्होंने मांग की कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश न की जाए, बल्कि महापौर और एमआईसी सदस्यों समेत सभी जिम्मेदारों को पद छोड़ना चाहिए।
कांग्रेस की सबसे बड़ी मांग पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराने की है। पार्टी का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही ने निर्दोष लोगों की जान ली है और दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
फिलहाल भागीरथपुरा इलाके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दूषित पानी से तीन हजार से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं, जबकि कई मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा, यह आंदोलन जारी रहेगा।
यह न्याय यात्रा न सिर्फ इंदौर की स्थानीय राजनीति, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रही है।

















