जबलपुर में NEYU का भर्ती सत्याग्रह 2.0 | MPPSC अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन


जबलपुर के घंटाघर में NEYU द्वारा भर्ती सत्याग्रह 2.0 का आयोजन किया गया। MPPSC परीक्षाओं में देरी, कम पद और पारदर्शिता की कमी को लेकर अभ्यर्थियों ने ज्ञापन सौंपा।


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उनकी बात Published On :

मध्यप्रदेश के हजारों विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों से जुड़ी शिक्षा एवं भर्ती संबंधी समस्याओं को लेकर National Educated Youth Union (NEYU) ने रविवार को जबलपुर में जोरदार लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलन किया। “भर्ती सत्याग्रह 2.0” के तहत घंटाघर, जबलपुर में आयोजित इस ज्ञापन प्रदर्शन में बड़ी संख्या में MPPSC अभ्यर्थी शामिल हुए और अपनी लंबित मांगों को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखा।

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में व्याप्त अनियमितताओं, अत्यधिक देरी, पदों की लगातार कमी और पारदर्शिता के अभाव की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना रहा।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने कानूनी तौर पर वैध तरीके से नारेबाजी करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। कार्यक्रम के अंत में NEYU प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय की अपील की।

NEYU नेताओं ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में लगातार हो रही देरी और सीमित पदों के कारण लाखों योग्य युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। वर्षों की तैयारी के बाद भी जब पदों की संख्या बेहद कम होती है, तो अभ्यर्थियों का मनोबल टूटता है और प्रतिभा का सही उपयोग नहीं हो पाता। संगठन का आरोप है कि बार-बार परीक्षा पैटर्न में बदलाव, उत्तर-कुंजी को लेकर असमंजस और भर्ती प्रक्रिया की अस्पष्टता युवाओं के साथ अन्याय है।


ज्ञापन में NEYU ने राज्य सेवा परीक्षा 2024 में न्यूनतम 700 पदों पर भर्ती, राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद सुनिश्चित करने, तथा इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा 2025 में 400 पदों के विज्ञापन की मांग रखी। इसके साथ ही ADPO भर्ती 2026 में 300 पद जारी करने और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग भी प्रमुख रही।

संगठन ने पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर चिंता जताते हुए एक सशक्त राज्य स्तरीय पेपर लीक कानून बनाने की मांग की, जिसमें छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हो। साथ ही वन सेवा परीक्षा में उत्तर-कुंजी की अधिकतम पारदर्शिता, इंटरव्यू प्रणाली में सुधार और अतिथि-संविदा प्रथा को समाप्त करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।

NEYU का यह भी कहना है कि MPPSC की सभी परीक्षाएँ UPSC की तर्ज पर एक वर्ष की समय-सीमा में पूरी की जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। परीक्षा प्रक्रिया घोषित होने के बाद उसमें बार-बार बदलाव न किए जाएँ—यह भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।

आंदोलन के दौरान वक्ताओं ने दो टूक कहा कि जब तक सरकार और आयोग ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक यह छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। NEYU ने यह संदेश देने की कोशिश की कि यह केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।



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