भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देशभर के किसान संगठनों में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), उसके गैर-राजनीतिक धड़े और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) सहित कई किसान संगठनों ने इस समझौते को भारतीय कृषि के लिए घातक बताते हुए 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसके साथ ही इन संगठनों ने 12 फरवरी को प्रस्तावित आम हड़ताल को भी समर्थन देने की घोषणा की है। कुलमिलाकर India-US trade deal को लेकर किसानों में सरकार के प्रति कोई विश्वास नज़र नहीं आ रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने एक कड़े बयान में आरोप लगाया कि भारत–अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने “पूरी तरह समर्पित” करने जैसा है। संगठन ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। SKM का कहना है कि वाणिज्य मंत्री देश को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बाहर रखा गया है, जबकि भारत–अमेरिका के संयुक्त बयान में गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने पर सहमति की बात कही गई है।
SKM के गैर-राजनीतिक धड़े ने भी जल्द ही बैठक कर बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा करने की बात कही है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि एक तरफ सरकार सोशल मीडिया पर किसानों को आश्वासन दे रही है, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक संयुक्त बयान भारतीय बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलने का संकेत देता है। उनके अनुसार यह स्थिति भारतीय किसानों के हितों के बिल्कुल विपरीत है और इससे उन्हें भारी नुकसान होगा।
अखिल भारतीय किसान सभा के नेता कृष्ण प्रसाद ने कहा कि इस व्यापार समझौते से सूखे अनाज, सोयाबीन तेल और पशु आहार से जुड़े उत्पादों के आयात का रास्ता खुलेगा, जिससे न केवल खेती बल्कि डेयरी क्षेत्र भी प्रभावित होगा। उनका आरोप है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए जा रहे ऐसे समझौते उनकी ठहरी हुई अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए हैं, न कि भारत के किसानों के लिए।
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि गांवों में किसान यह सवाल कर रहे हैं कि ये अंतरराष्ट्रीय समझौते सीधे उनके जीवन और आमदनी को कैसे प्रभावित करेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे 12 फरवरी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
वहीं पंजाब की क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि पहले से ही कम आय और बढ़ते कर्ज से जूझ रहे किसानों पर यह समझौता और दबाव डालेगा।
किसान संगठनों का यह भी आरोप है कि अमेरिका से आने वाले सस्ते और सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद—जैसे मक्का, गेहूं, सोयाबीन तेल और डेयरी उत्पाद—भारतीय बाजार में बाढ़ की तरह आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ेगा। SKM ने सरकार पर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने और किसानों, मजदूरों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
किसान संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों, श्रमिक संगठनों और जन संगठनों से 12 फरवरी की आम हड़ताल और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने इस समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन और व्यापक तथा तीव्र रूप ले सकता है।
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