जिले में जनवरी माह के दौरान सामने आई गुमशुदगी की घटनाएं अब सामान्य अपराध की श्रेणी से बाहर जाती दिखाई दे रही हैं। महज 31 दिनों में 71 बालिकाओं और महिलाओं का लापता होना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि समाज और परिवारों के लिए भी गंभीर चेतावनी है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में औसतन हर दिन दो लड़कियां-औरतें गायब हुईं, जिनकी शिकायतें संबंधित थानों में दर्ज हैं, फिर भी बड़ी संख्या में अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि लापता होने वालों में 15 से 20 वर्ष की उम्र की बालिकाओं और युवतियों की संख्या सबसे अधिक है। यह वही उम्र है, जब भावनात्मक अस्थिरता, सोशल मीडिया का प्रभाव और पारिवारिक संवाद की कमी बच्चों को गलत फैसलों की ओर धकेल देती है।
तीन घटनाएं, जो हकीकत बयां करती हैं
डोंगरगांव थाना क्षेत्र में 28 जनवरी की शाम एक किसान अपनी 20-22 वर्षीय पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ पतलोन गांव में चल रहे 10 कुंडीय हवन-यज्ञ में शामिल हुआ। दर्शन और प्रवचन के बाद लौटते समय उसने पत्नी को पंडाल के बाहर यह कहकर खड़ा किया कि वह बाइक लेकर आता है। महज दस मिनट में पत्नी और मासूम बेटी दोनों गायब हो गईं। पंडाल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। अंततः पीड़ित ने थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें एक नाबालिग बच्ची भी शामिल है।
गाडरवारा थाना क्षेत्र में 25 जनवरी को नर्मदा जयंती पर स्नान-पूजन के लिए गया एक परिवार जब रात करीब 10 बजे घर लौटा तो 15 वर्षीय बेटी नदारद मिली। बिटिया ने घर में मौजूद चाची से यह कहकर बाहर जाने की बात कही थी कि वह आंगन के वॉशरूम जा रही है। काफी तलाश के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो 27 जनवरी को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
स्टेशन गंज थाना क्षेत्र में 14 जनवरी को 17 वर्षीय किशोरी सहेली के साथ बाजार जाने की बात कहकर निकली थी। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजन घबरा गए। रिश्तेदारों, सहेलियों और संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, पर अब तक किशोरी का पता नहीं चल सका है।
आंकड़े जो हालात की गंभीरता दिखाते हैं
जनवरी 2026 में लापता हुई 71 बालिकाओं-महिलाओं में 11 से 20 वर्ष आयु वर्ग की 38 शामिल हैं। इनमें 15, 16 और 17 वर्ष की उम्र की 12 किशोरियां, 18 वर्ष की 11, 19 वर्ष की 7 और 20 वर्ष की 8 युवतियां शामिल हैं। साफ है कि किशोरावस्था और शुरुआती युवावस्था जिले में सबसे अधिक जोखिम वाला दौर बनता जा रहा है।
थाना-वार स्थिति
थाना-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो करेली से 14, स्टेशन गंज से 13, गाडरवारा से 11 और गोटेगांव से 9 बालिकाएं-महिलाएं लापता हुई हैं। इसके अलावा डोंगरगांव और नरसिंहपुर थाना क्षेत्र में तीन-तीन, चीचली में 6, तेंदूखेड़ा में 5 और साईंखेड़ा में 2 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं।
जनवरी में कुल 107 लोग गुम
जनवरी माह में जिले से कुल 107 लोग लापता हुए, जिनमें 71 महिलाएं, 35 पुरुष और एक किन्नर शामिल है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के भी गुम होने की घटनाएं सामने आई हैं, जो समस्या की व्यापकता को दर्शाती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था भावनात्मक उथल-पुथल का दौर होती है। इस उम्र में बालिकाएं आसानी से बहकावे में आ सकती हैं और परिणामों की गंभीरता को नहीं समझ पातीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल परिवार ही नहीं, बल्कि स्कूल स्तर पर काउंसलिंग भी जरूरी है, ताकि बच्चों को सही-गलत का फर्क समझाया जा सके।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुमशुदगी के पीछे कई कारण होते हैं—दोस्ती या प्रेम-प्रसंग, सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक कलह, माता-पिता की निगरानी की कमी और कुछ ग्रामीण इलाकों में भागकर शादी की परंपरा। पुलिस के मुताबिक नाबालिगों के मामलों में करीब 90 प्रतिशत तक रिकवरी की जाती है, लेकिन समय पर सूचना और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है।
समाज के लिए चेतावनी
जिले में लगातार बढ़ रही गुमशुदगी की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी है। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जहां बच्चे जल्दी परिपक्व होने का भ्रम पाल लेते हैं, वहीं परिवारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। संवाद, विश्वास और सतर्कता ही ऐसे मामलों को रोकने का सबसे मजबूत उपाय है।
यदि समय रहते समाज, परिवार और प्रशासन एकजुट नहीं हुए, तो ये आंकड़े आने वाले समय में और भयावह तस्वीर पेश कर सकते हैं।





























