भारतीय रेलवे में सफाई और यात्री सुविधाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संसद की Public Accounts Committee (PAC) की बैठक में ट्रेनों में बेहतर और खराब सुविधाओं के बीच बढ़ते अंतर को लेकर सरकार को कड़ी फटकार लगाई गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल कर रहे थे।
PAC की बैठक में एक बीजेपी सदस्य ने यह टिप्पणी की कि भारतीय रेलवे में एक तरह का “कास्ट सिस्टम” बन गया है, जहाँ प्रीमियम ट्रेनों—जैसे Vande Bharat Express—में बेहतर लिनन, साफ कोच और आधुनिक सुविधाएँ मिलती हैं, जबकि आम पैसेंजर और लंबी दूरी की ट्रेनों में सफाई की स्थिति बेहद खराब रहती है। इस टिप्पणी को लेकर बैठक में माहौल काफी गर्म रहा।
यह बैठक Comptroller and Auditor General of India (CAG) की उस रिपोर्ट की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी, जिसका शीर्षक था “Cleanliness and Sanitation in Long-Distance Trains in Indian Railways” और जो मार्च 2023 तक की अवधि से संबंधित है। बैठक में भारतीय रेलवे की ओर से सतीश कुमार, जो कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और CEO हैं, उपस्थित थे।
रेलवे बोर्ड ने क्या कहा?
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने समिति को बताया कि सफाई बनाए रखने में रेलवे को कई संरचनात्मक और प्रणालीगत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें ट्रेनों के सीमित ठहराव, गंभीर स्टाफ की कमी, बजट की सीमाएँ और रोज़ाना यात्रियों की भारी संख्या शामिल है। उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से सभी ट्रेनों में एक समान स्तर की सफाई सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।
हालाँकि PAC के सदस्यों ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। समिति के सदस्यों का कहना था कि ये समस्याएँ कोई नई नहीं हैं और इतने वर्षों में रेलवे को इनके स्थायी समाधान निकाल लेने चाहिए थे।
PAC की अहम सिफारिशें
PAC ने रेलवे को कई ठोस सुझाव दिए, जिनमें शामिल हैं—
- सभी रेलवे ज़ोन में नियमित सफाई ऑडिट कराए जाएँ।
- यात्रियों की शिकायतों से संबंधित एक केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाए, क्योंकि फिलहाल शिकायतों के प्राप्त और निस्तारण का कोई समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है।
- पूरे देश में एक समान यात्री शिकायत निवारण तंत्र लागू किया जाए।
- सफाई प्रदर्शन के आधार पर रेलवे ज़ोन को प्रोत्साहन और दंड दोनों दिए जाएँ।
- रेलवे लॉन्ड्री सिस्टम में सुधार के लिए एक विस्तृत अध्ययन कराया जाए।
- ‘क्विक-वॉटरिंग स्टेशन’ और बजट का मुद्दा
सतीश कुमार ने समिति को यह भी बताया कि लंबी दूरी की ट्रेनों में सफाई सुधारने के लिए रेलवे ने कई जगहों पर “क्विक-वॉटरिंग स्टेशन” शुरू किए हैं, जिससे कम समय के ठहराव में कोचों की सफाई और पानी की व्यवस्था हो सके। इस पर PAC ने ऐसे स्टेशनों की संख्या में काफी बढ़ोतरी करने और स्वच्छता बजट बढ़ाने की सिफारिश की।
आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं
भारतीय रेलवे रोज़ाना 12,541 पैसेंजर ट्रेनें चलाता है और करीब 1.75 करोड़ यात्रियों को सेवा देता है, जो 7,364 से अधिक स्टेशनों से होकर गुजरती हैं। PAC का मानना है कि इतने बड़े नेटवर्क में यदि प्रीमियम और साधारण ट्रेनों के बीच सफाई का अंतर बना रहेगा, तो यह यात्रियों के साथ भेदभाव जैसा ही माना जाएगा।
कुल मिलाकर, PAC की इस बैठक ने भारतीय रेलवे की स्वच्छता नीति और प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि रेलवे इन सिफारिशों पर कितना और कितनी जल्दी अमल करता है, ताकि ट्रेनों में “कास्ट सिस्टम” जैसे आरोपों को खत्म किया जा सके और सभी यात्रियों को समान सुविधा मिल सके।


























