यूनेस्को ने पन्ना टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया


पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों बाघों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण उन्हें यह दर्जा दिया गया है हालांकि एक तथ्य यह भी है कि यहां पिछले 10 महीनों में 22 बाघों की मौत हो चुकी है।


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Photo Credit: TOI


नई दिल्ली। यूनेस्को ने मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित कर दिया है। इसके साथ ही भारत में यूनेस्को के बायोस्फीयर रिजर्व की संख्या 22 हो चुकी है। इनमें से 11 बायोस्फीयर रिजर्व के विश्व नेटवर्क का हिस्सा हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसके लिए पन्ना टाइगर रिज़र्व को बधाई दी है।

2018 की गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 526 बाघ पाए गए थे इसके बाद कर्नाटक में 524 बार मिले थे। मध्यप्रदेश एक लंबे समय से टाइगर स्टेट के नाम से जाना जाता रहा है लेकिन साल 2010 में इससे यह दर्जा छिन गया था जब यहां केवल 257 भाग बच्चे थे लेकिन कुछ सालों के बाद यहां स्थिति सुधरी और दो हजार अट्ठारह में प्रदेश ने एक बार फिर टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल कर लिया है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों बाघों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण उन्हें यह दर्जा दिया गया है हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक तथ्य यह भी है कि यहां पिछले 10 महीनों में 22 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बाघों की मौत का कारण उनके क्षेत्राधिकार की लड़ाई है जिसमें वह घायल होकर जान गंवाते रहे हैं।ऐसे में यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा की पन्ना में बाघ सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं।

साल 1981 में स्थापित पन्ना टाइगर रिजर्व विंध्य क्षेत्र में स्थित है।  यह मध्य प्रदेश के उत्तर में पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला हुआ है। शुरुआत में यह राष्ट्रीय उद्यान था लेकिन साल 1994 में केंद्र सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया।

समाजवादी पार्टी ने भी प्रदेश में बाघों की संरक्षण को लेकर शिवराज सरकार पर तंज़ कसा। इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के इटावा की लायन सफारी से प्रदेश को सीख लेने की बात कही है।

 


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