CAPF Bill 2026 पर राज्यसभा में बवाल, दिग्विजय सिंह का सरकार पर बड़ा हमला


CAPF Bill 2026 पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा। दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और बिल वापस लेने की मांग की।


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राजनीति Published On :

नई दिल्ली में राज्यसभा के भीतर रविवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक 2026 (CAPF Bill 2026) पर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे या तो वापस लेने या फिर सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग उठाई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस दौरान केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए इसे सुरक्षा बलों के साथ अन्याय करार दिया।

राज्यसभा में पेश किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक-2026 को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक सुधार के बजाय मौजूदा समस्याओं को और जटिल बना सकता है।

कांग्रेस नेता Digvijaya Singh ने बहस के दौरान कहा कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 1 अप्रैल को “कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट” से जुड़ा मामला लंबित है, तो सरकार इतनी जल्दबाजी में इस विधेयक को क्यों पारित करना चाहती है।

सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि यह विधेयक CAPF के कैडर अधिकारियों के साथ हो रहे “प्रणालीगत अन्याय” को खत्म करने के बजाय उसे बनाए रखने का प्रयास है। उन्होंने CISF, CRPF, BSF, ITBP और SSB जैसे बलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संगठनों में वर्षों से पदोन्नति को लेकर असमानता बनी हुई है।

दरअसल, पूरा विवाद CAPF बनाम IPS के बीच पदोन्नति और अधिकारों को लेकर है। CAPF में दो तरह के अधिकारी होते हैं—एक वे जो UPSC के माध्यम से सीधे भर्ती होते हैं (कैडर अधिकारी) और दूसरे IPS अधिकारी, जिन्हें डेप्युटेशन पर भेजा जाता है।

समस्या की जड़ प्रमोशन नीति में असमानता है। जहां एक IPS अधिकारी 13-14 वर्षों में DIG रैंक तक पहुंच जाता है, वहीं CAPF के कैडर अधिकारियों को इसी पद तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं। कई मामलों में अधिकारी 10-12 साल तक असिस्टेंट कमांडेंट पद पर ही अटके रहते हैं।

डेटा यह भी बताता है कि CRPF और BSF जैसे बलों में 60% से अधिक अधिकारी लंबे समय तक प्रमोशन के इंतजार में रहते हैं। इससे न केवल उनका मनोबल गिरता है, बल्कि संगठनात्मक क्षमता पर भी असर पड़ता है।

इस मुद्दे पर पहले Supreme Court of India ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश दिया था कि CAPF में शीर्ष पदों पर IPS अधिकारियों का कोटा धीरे-धीरे कम किया जाए, ताकि कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकें। अदालत ने इसके लिए दो साल की समयसीमा भी तय की थी।

हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि नया CAPF Bill 2026 इस आदेश को प्रभावहीन बनाने की दिशा में कदम है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि सरकार इस तरह के कदम उठाती रही, तो भविष्य में युवा सुरक्षा बलों में भर्ती होने से हिचक सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जब देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले जवानों और अधिकारियों के साथ न्याय नहीं होगा, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक स्थिति पैदा कर सकता है। अंत में उन्होंने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की।

CAPF Bill 2026 को लेकर राज्यसभा में जारी यह विवाद केवल एक विधायी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक संतुलन से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार विपक्ष की मांगों पर विचार करती है या इस बिल को मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाया जाता है।



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