बताया जाता है कि सोवियत यूनियन में आप स्टालिन की आवाज़ से बच नहीं सकते थे। सड़कों पर लाउडस्पीकरों से स्टालिन की आवाज़ आपका पीछा करती रहती थी। हिटलर ने आत्मप्रचार के लिए…
राजनेताओं को संभलने का वक्त है. यह सोचने की जरूरत है कि आज राजनीति के नाम पर कड़वाहट क्यों मुंह में घुल जाती है?
‘व्यवस्था-आश्रित मीडिया जानता है कि कोई भी पाठक सवाल नहीं पूछने वाला है कि क्या अपराधियों और उनसे पीड़ित लोगों की सूचियाँ भी अब जाति और संप्रदायों के आधार पर तैयार होने लगीं…
जो भी आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और न्याय के लिए आवाज उठाता है, उस पर विकास विरोधी होने और ‘अर्बन नक्सल’ का ठप्पा लगाकर मुद्दे को खारिज करने का खेल शुरू हो…
मलिक ने अपनी चुप्पी तोड़ना तभी शुरू कर दिया था जब उन्हें गोवा से हटाकर मेघालय का राज्यपाल बना दिया गया था और पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ उनके इलाक़े पश्चिमी यूपी के किसान…
सोशल मीडिया या मीडिया चैनलों से किसी सकारात्मक भूमिका की उम्मीद करना बेमानी होगी। उम्मीद केवल नागरिक समाज से ही रह जाती है जो इन दोनों माध्यमों के सबसे बड़े ग्राहक और उपयोगकर्ता…
कर्नाटक (10 मई) के बाद मध्य प्रदेश ,राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित जिन राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं वे मोदी की 2024 में वापसी के लिए निर्णायक सिद्ध होने वाले हैं…
पिछले लगभग 44 साल से पूर्वांचल में आतंक का दूसरा नाम बन चुके अतीक और उसके गैंग से भिड़ने की कोशिश पुलिस या प्रशासन तो दूर सरकारें भी नहीं कर पाईं।
अब सत्ता की नज़रों में गांधी दारिद्र्य, दारुण्य और दया का प्रतीक बन कर रह गए हैं। उसके लिए फ़ाइव ट्रिलियन की इकानमी में प्रवेश करने वाले राष्ट्र को इस तरह के प्रतीकों…
ख़ैरियत है कि अभी महात्मा गाँधी के ख़िलाफ़ बीजेपी खुलकर बोल नहीं रही है, लेकिन नाथूराम गोडसे को प्रतिष्ठित करने की कोशिश तो स्पष्ट है।
राहुल गांधी कांग्रेस के पक्ष में 1980 का इतिहास दोहरा सकते हैं। सूरत की निचली अदालत के फ़ैसले के बाद राहुल गांधी ने सरकार की ओर अंगुली उठाते हुए कहा भी था :…
क्या कांग्रेस अब बीजेपी के चुनावी हथकंडों का इस्तेमाल उसके ही खिलाफ कर रही है? क्या इससे कांग्रेस को फायदा होगा? क्या बीजेपी के पास इसका कोई जवाब है? इन सवालों का सही…
क्या अतीक के साथ यूपी में जंगलराज को भी उम्रकैद की सज़ा होगी? इस सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है।
ऊपर की अदालतों के द्वारा अगर सूरत की सज़ा में किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाती है तो 22 अप्रैल के बाद के दो सालों के लिए राहुल गांधी के नए…
अगले दो महीने से भी कम समय में कर्नाटक विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव नतीजे ही इन सवालों का सटीक जवाब होंगे।
भारत में सत्ता पाने का सीधा माध्यम चुनाव में जीत हासिल करना होता है। इसलिए सबसे पहले जरूरत होती है कि चुनाव को प्रभावित किया जाए या यूं कहें उसे अपने कब्जे में…
इंदौर की गुल्लक धीरे-धीरे ख़ाली हो रही है। कुछ सिक्के जैसे कि गोकुलोत्सव जी महाराज और नरेंद्र सिंह तोमर या डॉ वैदिक के कवि-मित्र सरोजकुमार अभी शहर के पास हैं।
क्या मोदी के बाद देश का सबसे बड़ा नेता इनमें से ही कोई एक होगा? इन सवालों का जवाब तो वक्त के साथ ही मिलेगा।
आपकी समृतियों का संसार हम सबको जीवनभर प्रेरणा देता रहेगा। आपसे विदा लेना सम्भव नहीं है। आपसे सुखद स्मृतियों में ही सही मिलना होता रहेगा। लव यू बाबा।
महबूबा मुफ्ती दिखावे के लिए नहीं बल्कि मन से और विचार से यदि बदलना चाहती हैं तो उनको हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए.