मध्यप्रदेश में 75 लाख परिवारों तक पहुंचा जल जीवन मिशन, लेकिन 36 लाख अब भी प्यासे!


जल जीवन मिशन की ताजा रिपोर्ट में राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और केरल की धीमी प्रगति उजागर हुई। जानिए किन राज्यों में 100% ग्रामीण जल आपूर्ति हुई और किन चुनौतियों से मिशन को जूझना पड़ रहा है।



जल संसाधन से जुड़ी स्थायी समिति ने वर्तमान लोकसभा सत्र में पेश रिपोर्ट में बताया है कि “नल से जल” मिशन में राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और केरल फिसड्डी साबित हुए हैं। जबकि देश के 11 राज्यों में शत-प्रतिशत ग्रामीणों को नल से जल आपूर्ति शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट में समिति ने केंद्र सरकार को सिफारिश की है कि मिशन पुरा करने में राज्य सरकारों की समस्याओं पर गौर किया जाए।

रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 75.29 लाख परिवारों का नल कनेक्शन हो गया है और 36.60 लाख वंचित परिवारों का नल कनेक्शन होना बांकि है। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या कनेक्शन हुए नल से पानी मिल रहा है? जल जीवन मिशन में 34 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यप्रदेश 30 वें नंबर पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी से निजात दिलाने के लिए के लिए केन्द्र सरकार ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की शुरुआत किया था।

इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घरों में नल से जल की व्यवस्था सुनिश्चित करना था।इस जल जीवन मिशन का विस्तार 2028 तक बढ़ा दिया गया है। विस्तार देते हुए बताया गया है कि देश में अबतक 80 प्रतिशत घरों में पाइप से पानी का कनेक्शन हो गया है जो 2019 में 15 प्रतिशत था और अगले तीन वर्षों में शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया जाएगा।इस उद्देश्य के लिए सरकार ने 3.6 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। केन्द्रीय बजट 2025 – 26 में जल जीवन मिशन के लिए 67000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति के लिए 70162.90 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जबकि संशोधित अनुमान महज 29916.8 करोड़ रुपए का ही रहा।

असल में साल के अंत में वास्तविक बजट क्या होगा,यह सवाल बना रहेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अध्ययन है कि जल जीवन मिशन उद्देश्य के लक्ष्य को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत होगी, मुख्य रूप से महिलाओं के लिए, जो अन्यथा पानी इकट्ठा करने में खर्च होता है।

भारत सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए मध्यप्रदेश को 26952.10 करोड़ रुपए आबंटित किया है। राज्य के हिस्से के तहत रिपोर्ट किया गया व्यय 18674.80 करोड़ रुपए है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2025- 26 के बजट में जल जीवन मिशन और ग्रामीण पेयजल मिशन के अन्तर्गत 17136 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जिससे ग्रामीण अंचलों में जल स्रोतों का विकास,जल संरचना का निर्माण एवं उनका रखरखाव किया जाना प्रस्तावित है।

इस मिशन में मध्यप्रदेश का 30 वां स्थान होने के पीछे का पङताल करने से स्थिति साफ होता है। केन्द्र ने प्रदेश के 1271 गांवों में सर्वे किया तो इनमें 217 गांव ऐसे मिले, जिनमें नल तो नहीं लगे, लेकिन मिशन के पोर्टल पर काम पूरा बता दिया गया। जांच में केवल 209 गांवों में सभी जरूरी मानक पाए गए। थर्ड पार्टी एजेंसी ‌द्वारा लिए गए जल परिक्षण सैंपल में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।

सर्वे के दौरान बैक्टिरियल कंटामिनेशन और रसायनिक मिलावट पाई गई, जिससे मिशन की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार 65 गांवों की हकीकत जानने गए तो पाया कि इनमें से 47 गांवों में कहीं केवल पाइप डाले गए हैं तो कहीं सङकें खोद कर छोड़ दी गई है, लेकिन पानी नहीं पहुंचा है।

जबलपुर जिले के 1680 गांवों में नर्मदा नदी और बरगी बांध से हर घर जल योजना से पानी पहुंचाने का प्रोजेक्ट 2020- 21 में शुरू हुआ था। प्रोजेक्ट की लागत 2000 करोड़ रुपए की है। परन्तु आज भी लोग कुएं और बोरिंग से प्यास बुझा रहे हैं।

2024 में हर गांव तक पाइप लाइन बिछाने और टंकी बनाने का कार्य कर दिया जाना था। बताया गया कि पिछले साल बजट नहीं मिला था इसलिए कार्य में देरी हुई है। जानकारी के अनुसार अभी योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अटका हुआ है।

नर्मदा और हालोन नदी से मंडला जिले के नारायणगंज और बिछिया क्षेत्र के गांव में घर- घर जल पहुंचाने की घोषणा 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था। जिसमें बिछिया क्षेत्र को हालोन बांध से 440 गांव में 613.30 करोड़ रुपए से और बरगी जलाशय से नारायणगंज एवं बीजाडांडी के 182 गांव में 180.62 करोड़ रुपए का कार्य सितंबर 2022 में शुरू हुआ है।

बिछिया क्षेत्र के 134 ग्रामों में 134 टंकियों का निर्माण किया जाना है, लेकिन अबतक कोई भी पूर्ण नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि भ्रष्टाचार के कारण परियोजना समय अवधि में पूरा नहीं हो पा रहा है। सरकार का दावा है कि दिसंबर 2024 तक मंडला जिले की 179 योजनाएं पूर्ण हो गई है और 23 हजार 811 घरेलू नल कनेक्शन दें दिए गए हैं।

लेकिन प्रदेश के विभिन्न जिलों में पानी को लेकर ग्रामीणों द्वारा चक्का जाम किया जाना और महिलाओं का प्रशासन के समक्ष खाली पानी बर्तन को लेकर प्रदर्शन किये जाने का समाचार यह दर्शाता है कि जल जीवन मिशन की बेहतर निगरानी, समन्वय और गति देने की जरूरत है।





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