महू में स्क्वाड्रन लीडर आर.एस. यादव को दी गई अंतिम विदाई, पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार


महू में स्क्वाड्रन लीडर रणधीर सिंह यादव को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उन्होंने 1965 और 1971 के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


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इन्दौर Published On :

मध्यप्रदेश के महू में भारतीय वायु सेना के भूतपूर्व अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर रणधीर सिंह यादव को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। 88 वर्षीय यादव का निधन 22 मार्च को हुआ था, जिसके बाद 24 मार्च को कोदरिया पंचायत मुक्ति धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्क्वाड्रन लीडर रणधीर सिंह यादव भारतीय वायु सेना (IAF) के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्होंने अपने लंबे और गौरवशाली करियर में देश की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। वर्ष 1955 में वायु सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने करीब चार दशकों तक देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1993 में सेवानिवृत्ति तक उन्होंने कई जिम्मेदार पदों पर कार्य किया।

यादव न केवल एक कुशल अधिकारी थे, बल्कि एक उत्कृष्ट एयरोनॉटिकल इंजीनियर भी थे। उन्होंने Gnat, Hunter, Vampire, Krishak और Chetak जैसे विभिन्न विमान और हेलीकॉप्टरों पर काम किया, जो उनकी तकनीकी दक्षता और अनुभव को दर्शाता है। उनके योगदान ने भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत स्क्वाड्रन लीडर यादव ने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन युद्धों के दौरान उनकी सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण रहीं, जिसके लिए उन्हें उच्च अधिकारियों द्वारा सराहा गया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें AOC-in-C प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया था, जो उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।

महू स्थित कोदरिया मुक्ति धाम में हुए अंतिम संस्कार के दौरान भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना की टुकड़ियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर आर्मी वॉर कॉलेज महू के कमांडेंट मेजर जनरल गौरव ऋषि, SC, SM ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वहीं एयर कमोडोर एच.जे. पागे ने भी चीफ ऑफ एयर स्टाफ और सेंट्रल कमांड की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की।

इस भावुक माहौल में यादव के परिवारजन भी मौजूद रहे। उनके बेटों—पूर्व ब्रिगेडियर विक्रम यादव और परमवीर यादव—ने अंतिम चिता को अग्नि दी और सभी धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया। उनके पोते, जो स्वयं सेना में सेवाएं दे रहे हैं, भी इस अवसर पर उपस्थित थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि देशसेवा की परंपरा उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है।

स्थानीय पूर्व सैनिकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभी ने उनके अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति को याद करते हुए उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताया।

स्क्वाड्रन लीडर रणधीर सिंह यादव का जीवन देश के प्रति निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उनका योगदान न केवल भारतीय वायु सेना बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा।



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