लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर चल रहा सियासी गतिरोध मंगलवार को और गहरा गया। विपक्षी दलों ने एक असाधारण कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया। हालांकि, इसी के साथ विपक्ष ने बजट पर चर्चा में हिस्सा लेने का फैसला भी किया है, जिससे संसद का कामकाज पटरी पर लौटने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
विपक्ष की ओर से यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया, जिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी सहित कई दल इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने फिलहाल इससे दूरी बनाई है। कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष समेत विपक्षी सांसदों को बार-बार सदन में बोलने से रोका जा रहा है, जो संसदीय लोकतंत्र की बुनियादी भावना के खिलाफ है।
संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस अब नियमों के तहत जांच के लिए भेज दिया गया है और आगे की प्रक्रिया उसी के अनुसार तय होगी।
विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं, बल्कि लगातार मिल रही उपेक्षा और असमान व्यवहार के चलते उठाना पड़ा। कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने इसे “असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया असाधारण कदम” बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादाओं में रहते हुए अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन बार-बार अवसर नहीं दिए गए।
नोटिस में चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। पहला, 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। दूसरा, 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया गया, जिसे विपक्ष ने मनमाना करार दिया। तीसरा, एक सत्तापक्ष सांसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों पर कार्रवाई न होना। और चौथा, वह बयान जिसमें स्पीकर ने कहा कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था।
इन घटनाओं के बीच, विपक्षी दलों ने सदन के कामकाज को पूरी तरह ठप करने के बजाय बजट चर्चा में भाग लेने का फैसला किया है। विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद शशि थरूर करेंगे और संभावना है कि राहुल गांधी भी बहस में हिस्सा लें।
वहीं, सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। भाजपा की 11 महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले सात वर्षों में ओम बिरला ने लोकसभा की गरिमा और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उनका कहना है कि विपक्ष के आरोप तथ्यों से परे हैं।
कुल मिलाकर, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने संसद की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बजट चर्चा के दौरान संवाद बहाल होता है या यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होगा। लोकतंत्र की कसौटी इसी बात पर है कि सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद के दरवाजे कितने खुले रहते हैं।
















