प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा हाल ही में लोकसभा सचिवालय को भेजे गए एक पत्र ने संसद की कार्यप्रणाली और सरकार की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। PMO ने स्पष्ट किया है कि PM CARES Fund, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े सवाल लोकसभा में अस्वीकार्य (inadmissible) माने जाएँ। PMO का तर्क है कि ये तीनों कोष भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से नहीं, बल्कि स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान से संचालित होते हैं, इसलिए इन पर संसद में प्रश्न नहीं पूछे जा सकते।
इस निर्णय के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता से बचने का आरोप लगाया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि PMO लोकसभा के कामकाज को निर्देशित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि संसद का दायित्व सरकार से सवाल पूछकर उसे जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है।
लोकसभा में सवाल कौन तय करता है?
लोकसभा में पूछे जाने वाले सवालों का उद्देश्य सरकार से सार्वजनिक महत्व के विषयों पर जानकारी हासिल करना होता है। इसके लिए लोकसभा के Rules of Procedure and Conduct of Business में स्पष्ट नियम तय हैं। सांसदों द्वारा भेजे गए सवाल पहले लोकसभा सचिवालय के पास जाते हैं, जहाँ नियमों के आधार पर उनकी प्रारंभिक जाँच होती है। अंततः किसी सवाल को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है।
नियम 41 के अनुसार, कोई भी सवाल उस मंत्री के दायरे में होना चाहिए, जिससे वह संबंधित है, और सार्वजनिक महत्व का होना चाहिए। साथ ही, इसमें 23 शर्तें दी गई हैं—जैसे सवाल गोपनीय विषयों, न्यायालय में लंबित मामलों या राज्य सरकारों के विशेष अधिकार क्षेत्र से जुड़े नहीं होने चाहिए।
PMO ने अपने पत्र में नियम 41(2)(viii) और 41(2)(xvii) का हवाला दिया है, जिनके अनुसार ऐसे विषयों पर सवाल नहीं पूछे जा सकते जो भारत सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी में न आते हों या ऐसे निकायों से जुड़े हों, जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह न हों।
ये तीनों फंड क्या हैं?
PM CARES Fund एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जिसे कोविड-19 जैसी राष्ट्रीय आपदाओं से निपटने के लिए बनाया गया था।
PMNRF की स्थापना 1948 में हुई थी, जिसका उद्देश्य आपदाओं, दंगों और दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवारों की सहायता करना है।
NDF सशस्त्र बलों के जवानों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए बनाया गया कोष है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
क्या ये फंड सरकार के दायरे में नहीं आते?
इस सवाल पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। PRS Legislative Research से जुड़े चाक्षु रॉय का कहना है कि यह तय करना संसद का काम नहीं है कि ये निकाय सरकार का हिस्सा हैं या नहीं। कार्यपालिका का रुख अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन संसद को यह व्याख्या करने की भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
RTI के तहत स्थिति क्या है?
राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) Right to Information Act के दायरे में आता है। वहीं PM CARES और PMNRF को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मामले लंबित हैं। PM CARES से जुड़े केस की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होनी है।
क्या PMO ऐसा निर्देश दे सकता है?
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी के अनुसार, किसी विषय को पहले से ही सवालों से बाहर कर देना असामान्य है। उन्होंने कहा कि किसी सवाल की स्वीकार्यता उसके गुण-दोष के आधार पर तय होती है, न कि पूरे विषय को ही प्रतिबंधित कर दिया जाए। अंतिम फैसला हमेशा लोकसभा अध्यक्ष का ही होता है।
कुल मिलाकर, PMO के इस कदम ने संसद की स्वतंत्रता, सरकार की जवाबदेही और सार्वजनिक धन से जुड़े कोषों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी और तेज हो सकता है।


























