क्यों जीतने वाले जीतते चले जाते हैं और हारने वाले पीछे रह जाते हैं?


मैथ्यू इफेक्ट बताता है कि छोटी-सी बढ़त कैसे ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है


DeshGaon
फिलॉसफी Published On :

क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ लोग लगातार आगे ही बढ़ते जाते हैं, जबकि कुछ लोग उतनी ही मेहनत के बावजूद पीछे छूटते चले जाते हैं? यह केवल किस्मत या प्रतिभा का खेल नहीं है। इसके पीछे एक गहरा सिद्धांत काम करता है, जिसे मैथ्यू इफेक्ट कहा जाता है। यह प्रभाव बताता है कि शुरुआत में मिली बहुत छोटी-सी बढ़त समय के साथ इतनी बड़ी हो सकती है कि उसे पाटना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यह सिद्धांत खेल, करियर, शिक्षा, पैसा और यहां तक कि सोशल मीडिया की दुनिया में भी साफ दिखाई देता है।

हॉकी खिलाड़ियों का चौंकाने वाला उदाहरण

कनाडा में जब शोधकर्ताओं ने प्रोफेशनल हॉकी खिलाड़ियों के जन्म महीनों का विश्लेषण किया, तो एक अजीब पैटर्न सामने आया। ज़्यादातर खिलाड़ी जनवरी, फरवरी या मार्च में जन्मे थे। सवाल उठता है—ऐसा क्यों?

दरअसल, कनाडा में जूनियर हॉकी लीग के लिए कटऑफ डेट 1 जनवरी होती है। इसका मतलब है कि 2 जनवरी को जन्मा बच्चा और 30 दिसंबर को जन्मा बच्चा एक ही आयु वर्ग में खेलते हैं, जबकि उम्र का अंतर लगभग 11 महीने का होता है। बचपन में यह अंतर बहुत बड़ा होता है—शारीरिक ताकत, लंबाई, समन्वय और मानसिक विकास में।

जो बच्चे साल की शुरुआत में पैदा होते हैं, वे थोड़े बड़े और मजबूत दिखते हैं। नतीजा यह होता है कि:

  • उन्हें बेहतर टीमों में चुना जाता है

  • उन्हें ज़्यादा खेलने का मौका मिलता है

  • ज़्यादा अभ्यास से उनका प्रदर्शन सुधरता है

  • उन्हें अधिक पहचान और मौके मिलते हैं

कुछ सालों बाद, जो फर्क सिर्फ महीनों का था, वह कौशल और अवसरों की खाई में बदल जाता है। यही है मैथ्यू इफेक्ट।

मैथ्यू इफेक्ट क्या कहता है?

इस सिद्धांत का नाम बाइबिल की एक पंक्ति से लिया गया है—
“जिसके पास है, उसे और दिया जाएगा; और जिसके पास नहीं है, उससे वह भी छिन जाएगा जो उसके पास है।”

आधुनिक संदर्भ में इसका अर्थ है: जिसे शुरुआत में थोड़ी बढ़त मिलती है, समय के साथ उसे और मौके मिलते जाते हैं।

प्रसिद्ध लेखक Outliers में लेखक Malcolm Gladwell ने इस प्रभाव को विस्तार से समझाया है।

यह प्रभाव सिर्फ खेल तक सीमित नहीं

  1. करियर में
    पहली नौकरी, पहला बॉस या पहला बड़ा प्रोजेक्ट पूरी करियर दिशा तय कर सकता है। एक मौका दूसरे मौके को जन्म देता है।

  2. कंटेंट क्रिएशन और लेखन में
    जो व्यक्ति नियमित लिखता या पोस्ट करता है, वही आगे निकलता है। निरंतरता ही पहचान बनाती है।

  3. पैसे और निवेश में
    जल्दी शुरू किया गया छोटा निवेश चक्रवृद्धि ब्याज से बड़ी संपत्ति बन सकता है। देर से शुरू करने वाला अक्सर पीछे रह जाता है।

मैथ्यू इफेक्ट को अपने पक्ष में कैसे करें?

  1. जल्दी शुरुआत करें (Time)
    आज उठाया गया छोटा कदम, कल उठाए गए बड़े कदम से ज़्यादा असरदार हो सकता है।

  2. सही माहौल चुनें (Place)
    ऐसे वातावरण में रहें जहां अवसर, सीख और नेटवर्किंग की संभावना ज़्यादा हो।

  3. औसत से थोड़ा बेहतर करें (Intensity)
    बहुत ज्यादा नहीं, बस थोड़ा सा बेहतर—लेकिन लगातार।

सिस्टम बनाइए, सिर्फ लक्ष्य नहीं

लक्ष्य दिशा बताते हैं, लेकिन सिस्टम आपको वहां तक पहुंचाते हैं। आदतों को इतना आसान बनाइए कि उन्हें दोहराना मुश्किल न लगे। जब दोहराव आसान हो जाता है, तो मैथ्यू इफेक्ट अपने आप काम करने लगता है।

मैथ्यू इफेक्ट कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे फैसलों का परिणाम है। छोटी-सी बढ़त, अगर सही दिशा में और लगातार ली जाए, तो वही आपको भीड़ से अलग खड़ा कर सकती है।

 आज ही एक छोटा कदम चुनिए—चाहे पढ़ाई हो, हुनर हो या पैसा—और उसे रोज़ दोहराइए। वक्त के साथ वही छोटा कदम आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।



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